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विषय: हिंदी व्याकरण
सामान्य निर्देश:
१. इस प्रश्न-पत्र में पाँच खंड हैं — अ, ब, स, द, और य।
२. सभी प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य है।
३. उत्तर स्पष्ट एवं शुद्ध हिंदी में लिखें।
४. जहाँ विकल्प दिए गए हों, वहाँ कोई एक प्रश्न करें।
५. पत्र, निबंध आदि में प्रारूप का विशेष ध्यान रखें।
खंड अ — अपठित गद्यांश 20 अंक
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह समाज में रहकर ही अपना विकास कर सकता है। भाषा उस सामाजिक जीवन का आधार है। भाषा के बिना न तो विचारों का आदान-प्रदान संभव है और न ही ज्ञान का संरक्षण। इसीलिए किसी भी राष्ट्र की भाषा उसकी संस्कृति और पहचान का प्रतीक होती है।
हिंदी भारत की राजभाषा है और लगभग 50 करोड़ से अधिक लोग इसे अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं। फिर भी, आज के युग में अंग्रेजी का वर्चस्व बढ़ता जा रहा है। नौकरी, व्यापार और शिक्षा में अंग्रेजी की माँग ने हिंदी को हाशिए पर धकेल दिया है। इस स्थिति में हमें सोचना होगा — क्या हम अपनी भाषाई पहचान खो रहे हैं?
भाषा केवल संवाद का साधन नहीं, वह विचारों की नींव है। जिस भाषा में हम सपने देखते हैं, उसी में हम सबसे गहराई से सोचते हैं। इसलिए हिंदी को न केवल संरक्षित करना है, बल्कि उसे समृद्ध भी बनाना है। यहाँ अनेक भाषाएँ, धर्म, जातियाँ और परम्पराएँ मिल-जुलकर एक सुंदर संस्कृति का निर्माण करती हैं। यही विविधता में एकता भारत की सबसे बड़ी शक्ति है। जब हम किसी उत्सव में एकत्र होते हैं — चाहे वह होली हो, ईद हो या दीपावली — तो यह विभाजन की रेखाएँ मिट जाती हैं और हम सभी पहले भारतीय बन जाते हैं।
परन्तु आज के युग में कुछ तत्व इस एकता को तोड़ने का प्रयास करते हैं। सोशल मीडिया पर झूठी सूचनाएँ फैलाई जाती हैं, भय और घृणा को बढ़ावा दिया जाता है। ऐसे समय में हम युवाओं की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। हमें विवेक से काम लेना होगा, सच और झूठ में अंतर करना होगा, और भारत की समन्वयी संस्कृति की रक्षा करनी होगी।
महात्मा गांधी ने कहा था — "अनेकता में एकता ही भारत की विशेषता है।" आज इस विशेषता को जीवित रखना ही हमारा सबसे बड़ा राष्ट्रीय कर्तव्य है।
खंड ब — व्याकरण प्रयोग 25 अंक
खंड स — भाषा-कौशल 25 अंक
खंड द — शब्द-भंडार एवं रचना 15 अंक
खंड य — रचनात्मक लेखन 15 अंक